हे राम रमैया वो कृष्ण कन्हैया वो वही मेरा इश है. हे राम रमैया वो कृष्ण कन्हैया वो वही मेरा इश है.
जिंदगी जहां से होती है शुरू ; वहीं मिलती है देवदार के दरख्तों से भी ज्यादा सघन , ज्य जिंदगी जहां से होती है शुरू ; वहीं मिलती है देवदार के दरख्तों से भी ज्यादा सघन ,...
आपस में हो जहाँ सभी को एक दूसरे से प्यार हां,उसी को तो कहते हैं परिवार आपस में हो जहाँ सभी को एक दूसरे से प्यार हां,उसी को तो कहते हैं परिवार
संघर्ष ही जीवन है... संघर्ष ही जीवन है...
मनुज ग्रसित पाखंड से ,लोभ रहा आधार । बनिये बगुला भगत नहीं,करिये शुद्ध विचार ।। पंच मनुज ग्रसित पाखंड से ,लोभ रहा आधार । बनिये बगुला भगत नहीं,करिये शुद्ध विचार ।...
तू मुझ मे समा मै तुझ मे समा ....... तन से रूह तक छू कर होने लगे फ़ना। तू मुझ मे समा मै तुझ मे समा ....... तन से रूह तक छू कर होने लगे फ़ना।